Saturday, March 26, 2011

नाम को बस तेरे खाली सम्मान है

माँ बहन और बेटी
तेरे कर्त्तव्य की यही है इति,
इसके आगे अगर आवाज उठाएगी
तो बस हाहाकार मचाएगी .
बलात्कार और मार है
अत्याचार और चार है.
भोग वस्तु तू, सोंदर्य वस्तु तू,
जिह्वा सी चंचल, लालसा सी सस्ती तू.
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अहंकार है अमान है
बेबस तेरा सम्मान है

चिंघाडति तू सपन दिवस में
अन्धकार में लोप है,
भ्रूण हत्या , दहेज़ हत्या
ओह! तू विषम प्रकोप है.

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वासना विवशता
हवस की कुरूपता
सब तेरे लिए ही रूप है,
जग जो करे सम्मान ,
पीछे वही कितना कुरूप है.
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समय की चाल है
तेरे नाम पर बवाल है,
टुकड़े टुकड़े करके तुझे
बचे ? बड़ा सा सवाल है.

अंतर्द्वंद है ममतामयी
करुना का क्रंदन है.
आजाद तू शिलाओ सी
पैरो में सेकड़ो बंधन है.
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ना तब थी ना अब है
तेरे लिए सब कब है.
सीता अहिल्या अनुपमा राधिका अरुणा सरीला अमीना जेसिका दिव्या …………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………..
क्या कहे कितने नाम है
नाम को बस तेरे
खाली सम्मान है.

हर बात कही नहीं जाती.


हाँहरबातकहीनहींजाती
जैसे दिल में दबी हो
और बाहेर नहीं आती
कैसे दिखाना है
और क्यों दिखाना है ?
मुझमे जो नहीं है
वो दिखता क्यों है?
और जो है मेरे रोम रोम में
वो छिपता क्यों है.
प्यार है गुनाह तो बस एक बार बख्श दे
अब ज़माने की जलालत सही नहीं जाती.
हाँ हर बात कही नहीं जाती
जैसे दिल में दबी हो
और बाहेर नहीं आती
मैं क्यों हूँ
उसके बगैर
और वो क्यों रहे मेरे बगैर
क्यों है तेरा ये फेसला
मुझको मंजूर हर हाल में ,
कोई नहीं मिलता जवाब भी
उस खुदा से मुझे,
जिसने रखा मुझे हर सवाल में.
अब है धड़कन मद्धम सी, दूरी नहीं जाती.
हाँ हर बात कही नहीं जाती.
जैसे दिल में दबी हो
और बाहेर नहीं आती.
क्यों सुनता है तू
वो अनचाहे मामले,
कर देता है क्यों
मनचाहे फेसले.
मेरी जिद क्यों जरुरी नहीं तेरे लिए ,
रख दे हथेली पर मेरे
वो जो मेरा है,मेरे लिए.
कर दे करम ,हर दुआं यूँ,ही, रखी नहीं जाती.
हाँ हर बात कही नहीं जाती.
जैसे दिल में दबी हो
और बाहेर नहीं आती.